रविवार, २६ फेब्रुवारी, २०२३

पल

 घनी रात है ये जहां

ना चॉंद साथ है, वहां

सितारे समेट लो 


ना माझी देखो मुडमुडके

खोल ऑंखे बस आजके 

नजारे समेट लो


गमों का दर्या है जहाँ

मिले खुशी के पल यहाँ

ये सारे समेट लो..

ये सारे समेट लो...

दी_नें_दां

दीप्ती नेने दांडेकर

२५.०२.२३

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